हथियारों के सुरक्षित परीक्षण के लिए भारतीय नौसेना को मिली रिमोट-नियंत्रित स्वदेशी टारगेट बोट, 25 किमी दूर से हो सकेगी नियंत्रित

हथियारों के सुरक्षित परीक्षण के लिए भारतीय नौसेना को मिली रिमोट-नियंत्रित स्वदेशी टारगेट बोट, 25 किमी दूर से हो सकेगी नियंत्रित


समंदर की लहरों पर भारत का दबदबा और रक्षा क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता अब एक नए मुकाम पर पहुँच रही है।

भारतीय नौसेना को एक ऐसा स्वदेशी हथियार मिला है, जो बिना किसी जांबाज नौसैनिक की जान जोखिम में डाले, हमारे जंगी जहाजों की मारक क्षमता को और अचूक बनाएगा।

म बात कर रहे हैं एक अत्याधुनिक 'रिमोट-नियंत्रित टारगेट बोट' (Remote-Controlled Target Boat - RCTB) की। इसे पूरी तरह से भारतीय कंपनी 'लोटस वायरलेस टेक्नोलॉजीज' (Lotus Wireless Technologies - LWT) ने डिजाइन और विकसित किया है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और यह हमारी नौसेना के लिए कितनी बड़ी उपलब्धि है।

25 किलोमीटर दूर से कंट्रोल, बिना किसी क्रू के​

ज़रा कल्पना कीजिए—समंदर के बीचों-बीच लहरों को चीरती हुई एक तेज़-तर्रार बोट आगे बढ़ रही है, लेकिन उसे चलाने वाला कोई भी इंसान उस पर मौजूद नहीं है!

इसका स्टीयरिंग किसी जहाज पर नहीं, बल्कि वहां से 25 किलोमीटर दूर बैठे एक ऑपरेटर के हाथ में है। बिल्कुल वैसे ही, जैसे आप रिमोट से किसी वीडियो गेम में गाड़ी चलाते हैं या ड्रोन उड़ाते हैं।

25 किमी की यह जबरदस्त रेंज सुनिश्चित करती है कि हमारे सैनिक खतरे वाले इलाके (Hazardous zones) से बिल्कुल सुरक्षित दूरी पर रहें।

नौसेना को इसकी जरूरत क्यों है? (टारगेट बोट का असली काम)​

जब नौसेना किसी नई मिसाइल, तोप या हथियारों का परीक्षण करती है, तो उन्हें निशाना लगाने के लिए समंदर में एक चलते-फिरते डमी दुश्मन जहाज की जरूरत होती है। इसे 'मूविंग टारगेट' कहते हैं।

पहले के समय में, या बिना ऐसी तकनीक के, युद्ध अभ्यास और हथियारों के परीक्षण में हमेशा एक खतरा बना रहता था। लेकिन अब यह अनमैन्ड (चालक रहित) स्वदेशी बोट दुश्मन के जहाज का रोल निभाएगी।

नौसेना इस पर असली हथियारों से फायर करके अपनी मारक क्षमता और सटीकता की जांच कर सकेगी।

इसका सीधा सा मतलब है—ट्रेनिंग और वेपन टेस्टिंग 100% असली जैसी होगी, लेकिन हमारे नौसैनिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।

सिर्फ 'टारगेट' नहीं, कई अन्य मोर्चों पर भी माहिर​

यूं तो इसे 'टारगेट बोट' का नाम दिया गया है, लेकिन लोटस वायरलेस (LWT) द्वारा विकसित यह तकनीक कई अन्य काम भी कर सकती है।

अगर बोट से क्रू को हटा दिया जाए, तो जगह और वजन बचता है, जिसका इस्तेमाल बेहतरीन सेंसर्स लगाने में हो सकता है।

भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल कई अहम अभियानों में हो सकता है:
  • निगरानी और रेकी (Surveillance & Reconnaissance): दुश्मन की हरकतों पर चुपचाप नज़र रखने के लिए।
  • सर्च और रेस्क्यू (Search & Rescue): समुद्री तूफानों या खतरनाक हालातों में फंसे लोगों को बचाने के लिए, जहाँ इंसानी जान को सीधा खतरा हो।

आत्मनिर्भर भारत और 'डिफेंस' सेक्टर की नई छलांग​

यह प्रोजेक्ट भारतीय 'डिफेंस' (defence) सेक्टर की बढ़ती ताकत और 'मेक इन इंडिया' का एक शानदार उदाहरण है।

आज के समय में दुनिया भर की आधुनिक नौसेनाएं 'अनमैन्ड सरफेस वेसल्स' (USVs) यानी बिना इंसान के चलने वाले समुद्री जहाजों की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं।

भारतीय नौसेना भी पिछले कुछ समय से समंदर में निगरानी और ऑपरेशंस के लिए ऐसी ही मानवरहित प्रणालियों (Unmanned platforms) को शामिल करने पर जोर दे रही है।

किसी भारतीय प्राइवेट टेक कंपनी द्वारा इस तरह की जटिल 'मिशन-कंट्रोल' और 'रिमोट-कंट्रोल' तकनीक को सफलता से विकसित करना यह साबित करता है कि भविष्य की जंग और रक्षा तकनीक के लिए भारत अब विदेशी कंपनियों का मोहताज नहीं है।

यह स्वदेशी रिमोट-कंट्रोल्ड बोट भारतीय नौसेना के उसी सुनहरे और सुरक्षित भविष्य की एक दमदार झलक है।
 

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