पाकिस्तानी J-10C पर भारी तेजस Mk-1A: 160 किमी रेंज वाली अस्त्र Mk1 मिसाइल और लो-RCS कैसे बनेंगे गेमचेंजर?

पाकिस्तानी J-10C पर भारी तेजस Mk-1A: 160 किमी रेंज वाली अस्त्र Mk1 मिसाइल और लो-RCS कैसे बनेंगे गेमचेंजर?


भारतीय वायुसेना की ताकत में अब एक ऐसा स्वदेशी तूफान शामिल होने जा रहा है, जो सरहद पार बैठे दुश्मनों की नींद उड़ा देगा।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अपने सबसे उन्नत और स्वदेशी लड़ाकू विमान, तेजस Mk1A (Tejas Mk1A) का पहला बैच वायुसेना को सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अब तक अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस से F404-IN20 इंजनों की सप्लाई में जो रुकावट आ रही थी, वह अड़चन अब दूर हो चुकी है। अगस्त 2026 तक HAL को कुल 10 इंजन मिल चुके हैं और दिसंबर 2026 तक यह संख्या 22 हो जाएगी। इंजनों की सप्लाई स्थिर होते ही तेजस का प्रोडक्शन अब पूरी रफ्तार पर है।

48,000 करोड़ रुपये के 83 विमानों के कॉन्ट्रैक्ट और 97 अतिरिक्त विमानों की मंजूरी के बाद, वायुसेना के पास कुल 180 तेजस Mk1A का एक विशाल और अभेद्य बेड़ा होगा।

सरहद पर सीधी तैनाती: सेकेंड्स में होगा 'स्क्रैम्बल'​

रणनीतिक तौर पर देखें तो वायुसेना कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इन नए तेजस विमानों की पहली स्क्वाड्रन को सीधे राजस्थान के फॉरवर्ड बेस—विशेषकर बीकानेर के नाल एयरबेस पर तैनात करने की योजना है।

इंटरनेशनल बॉर्डर से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर इस तैनाती का सीधा मतलब है: रिएक्शन टाइम में भारी कमी

अगर पश्चिमी मोर्चे पर दुश्मन के किसी भी विमान या ड्रोन ने भारतीय हवाई सीमा में घुसपैठ की जुर्रत की, तो हमारे तेजस मिनटों में उड़ान (Scramble) भरकर हवा में ही उसका काम तमाम कर देंगे।

यह भारत के पश्चिमी एयर डिफेंस ग्रिड को एक फौलादी दीवार में बदल देगा।

चीनी J-10C बनाम तेजस Mk1A: रडार को चकमा देने की कला​

पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के आधुनिक होते बेड़े का मुकाबला करने के लिए हाल ही में चीन से J-10C फाइटर जेट्स खरीदे हैं। लेकिन हमारा स्वदेशी तेजस Mk1A इस चीनी ड्रैगन पर भारी पड़ने वाला है, और इसका सबसे बड़ा कारण है— Low RCS (रडार क्रॉस-सेक्शन)

इसे आसान भाषा में समझें: RCS वह पैमाना है जो तय करता है कि कोई विमान दुश्मन के रडार स्क्रीन पर कितना बड़ा या साफ दिखाई देगा।
  • तेजस को खास कंपोजिट मैटेरियल (हल्के लेकिन बेहद मजबूत पदार्थ) और रडार की तरंगों को सोखने वाले खास RAM (Radar Absorbent Material) पेंट से बनाया गया है।
  • इसके एयर-इनटेक (हवा खींचने वाले हिस्से) को 'Y' आकार में डिज़ाइन किया गया है। इससे होता यह है कि इंजन की घूमती हुई ब्लेड्स सीधे दुश्मन के रडार की नजरों में नहीं आतीं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तेजस Mk1A का फ्रंटल RCS पाकिस्तानी J-10C के मुकाबले करीब 60% कम है। J-10C आकार में काफी बड़ा है, जिसका RCS 0.5 से 1.5 स्क्वायर मीटर के बीच माना जाता है।

नतीजा यह है कि J-10C रडार पर जल्दी चमक जाएगा, जबकि तेजस आसमान में एक 'अदृश्य शिकारी' की तरह उड़ेगा। इससे तेजस को हवाई युद्ध का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र मिल जाता है— "पहले देखो, पहले मारो" (Track first, shoot first)

अस्त्र Mk1 और उत्तम रडार: आसमान में मौत का कॉम्बो​

तेजस की यह 'स्टील्थ' (छिपने की) खूबी जब इसकी अत्याधुनिक मिसाइलों और रडार से जुड़ती है, तो यह अजेय हो जाता है।

तेजस Mk1A पूरी तरह से स्वदेशी उत्तम AESA रडार से लैस होने जा रहा है। AESA रडार की खासियत यह है कि यह बिना अपनी डिश को घुमाए, एक ही समय में कई दुश्मनों को ट्रैक कर सकता है और उन्हें रडार के जाम होने का खतरा भी कम होता है।

बात करें 'बियॉन्ड विजुअल रेंज' (BVR - यानी नजरों से परे की दूरी) कॉम्बैट की, तो भारतीय तेजस की मुख्य ताकत है स्वदेशी अस्त्र Mk1 (Astra Mk1) मिसाइल।

DRDO ने हाल ही में इस मिसाइल को और भी घातक बनाते हुए इसकी 'हेड-ऑन' मारक क्षमता (जब दोनों विमान आमने-सामने आ रहे हों) को बढ़ाकर लगभग 160 किलोमीटर कर दिया है।

इसके उलट, पाकिस्तानी J-10C में चीन से आयातित PL-15E (एक्सपोर्ट वर्जन) मिसाइल लगी है, जिसकी मारक क्षमता तकनीकी रूप से लगभग 145 किलोमीटर तक ही सीमित है (चीन अपनी असली और लंबी रेंज वाली मिसाइलें निर्यात नहीं करता)।

युद्ध के मैदान में इसका क्या मतलब है?​

चूंकि तेजस का रडार सिग्नेचर बेहद छोटा है और अस्त्र मिसाइल की रेंज ज्यादा है, इसलिए एक भारतीय पायलट पाकिस्तानी J-10C को बहुत दूर से ही लॉक कर लेगा।

J-10C के पायलट को पता भी नहीं चलेगा कि कोई उसे ट्रैक कर रहा है, और हमारा तेजस 160 किमी दूर से ही अस्त्र मिसाइल दागकर, दुश्मन के रडार में खतरे की घंटी बजने से पहले ही सुरक्षित वापस मुड़ जाएगा।

निष्कर्ष​

पाकिस्तान भले ही आकार में बड़े विमानों पर दांव लगा रहा हो, लेकिन भारत की रणनीति आधुनिक, हल्की और 'स्मार्ट' वॉरफेयर की है।

जब राफेल और सुखोई-30MKI जैसे भारी लड़ाकू विमानों के साथ हमारा तेजस Mk1A भारतीय वायुसेना की अगली पंक्ति में खड़ा होगा, तो यह एक ऐसा घातक 'डिफेंस नेटवर्क' बनाएगा जिसे भेद पाना किसी भी दुश्मन के लिए नामुमकिन होगा।
 
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