भारत में बनेंगे रूस के दमदार SJ-100 पैसेंजर जेट, HAL और UAC के बीच जल्द होगा ऐतिहासिक समझौता

भारत में बनेंगे रूस के दमदार SJ-100 पैसेंजर जेट, HAL और UAC के बीच जल्द होगा ऐतिहासिक समझौता


भारतीय नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) के आसमान में जल्द ही एक नया और ऐतिहासिक सूरज उगने वाला है। करीब चार दशकों के लंबे इंतजार के बाद, भारत में एक बार फिर से पूरी तरह स्वदेशी रूप से यात्री विमानों का निर्माण शुरू होने जा रहा है।

भारत की शान और सरकारी क्षेत्र की प्रमुख 'डिफेंस' एवं एयरोस्पेस कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), रूस की यूनाईटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के साथ एक बेहद अहम समझौते को अंतिम रूप देने की कगार पर है।

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो जल्द ही रूस का दमदार SJ-100 पैसेंजर जेट भारत की धरती पर ही बनेगा।

समझौते की ताज़ा स्थिति क्या है?​

हाल ही में 'इनोप्रोम इंडिया फोरम' में बोलते हुए UAC के महानिदेशक वादिम बदेखा ने एक बड़ी खुशखबरी दी। उनके मुताबिक, HAL और UAC के बीच इस शानदार डील के 80 फीसदी से ज्यादा जरूरी कागजी काम पूरे हो चुके हैं।

बदेखा को पूरा विश्वास है कि जल्द ही फाइनल एग्रीमेंट पर दस्तखत हो जाएंगे। उनका तो यहां तक कहना है कि आगामी 'एयरो इंडिया 2027' प्रदर्शनी तक वे SJ-100 जेट के पहले भारतीय ऑपरेटर (खरीदार) की भी घोषणा कर सकते हैं।

यानी बात अब सिर्फ फाइलों में नहीं रही, बल्कि असल निर्माण की तरफ तेजी से बढ़ रही है।

भारतीय एविएशन के लिए यह ऐतिहासिक छलांग क्यों है?​

इसे समझने के लिए हमें थोड़ा इतिहास में जाना होगा। भारत में आखिरी बार पूरा यात्री विमान साल 1988 में बना था, जिसका नाम 'Avro HS-748' था। उसके बाद से हम कमर्शियल यात्री विमानों के लिए पूरी तरह से बोइंग (Boeing) या एयरबस (Airbus) जैसी विदेशी कंपनियों पर ही निर्भर रहे हैं।

अब बात करते हैं SJ-100 की। यह एक संकरी बॉडी (narrow-body) वाला दो इंजन का क्षेत्रीय (रीजनल) जेट है। सरल भाषा में कहें, तो यह एक बेहतरीन और फुर्तीला विमान है, जिसे रूस ने नए शक्तिशाली PD-8 इंजनों के साथ पूरी तरह से स्वदेशी पुर्जों (Import-substituted) के साथ अपग्रेड किया है।

डिफेंस और एविएशन से जुड़े जानकारों का मानना है कि भारत सरकार की 'उड़ान' (UDAN) योजना के लिए यह विमान एकदम 'ब्रह्मास्त्र' साबित होगा, क्योंकि 'उड़ान' योजना का मुख्य मकसद ही देश के छोटे और मंझोले शहरों को सस्ते हवाई सफर से जोड़ना है।

क्या है मास्टर प्लान?​

  • निर्माण की शुरुआत: एक बार HAL को लाइसेंस मिल जाए और सेटअप तैयार हो जाए, तो अगले करीब 3 सालों में भारत में इनका वास्तविक निर्माण (Production) शुरू होने की उम्मीद है।
  • उत्पादन क्षमता: लक्ष्य यह है कि हर साल 20 से 40 विमान बनाए जाएं। इससे न केवल भारत, बल्कि हिंद महासागर के आस-पास के देशों (जैसे मालदीव, मॉरीशस आदि) की डिमांड भी आसानी से पूरी की जा सकेगी।
  • लाइसेंस और सपोर्ट: समझौते के तहत, HAL इस रूसी विमान को भारतीय आसमान में उड़ने लायक सर्टिफिकेशन (DGCA से) दिलाने में UAC की मदद करेगा। इसके बदले में, रूस की UAC भारत को घरेलू उत्पादन, बिक्री और रखरखाव का पूरा लाइसेंस देगी। साथ ही, रूसी इंजीनियर HAL को भारत में बेहतरीन मैन्युफैक्चरिंग फैक्टरी लगाने में अपनी विशेषज्ञता और तकनीकी मदद भी देंगे।

सिर्फ जेट ही नहीं, प्रोपेलर विमान Il-114-300 भी है कतार में​

इस करार में एक और शानदार विमान शामिल है - Il-114-300। यह एक टर्बो-प्रॉप (पंखे वाला) विमान है।

कई छोटे हवाई रूट्स (जैसे पहाड़ी इलाके या कम दूरी वाले शहर) ऐसे होते हैं जहाँ बड़े जेट विमान उड़ाना आर्थिक रूप से बहुत महंगा पड़ता है। ऐसे रूट्स के लिए Il-114-300 विमान बिल्कुल सटीक बैठेगा।

बदेखा के अनुसार, आने वाले समय में भारत में हर साल ऐसे 30 से 40 विमान बनाए जा सकते हैं।

आगे का रास्ता और 'आत्मनिर्भर भारत'​

विदेशी विमानों को भारत में नागरिक उड़ान का क्लीयरेंस (Civil Certification) दिलाना हमेशा से एक सख्त और लंबी प्रक्रिया रही है। लेकिन, UAC को अपने विमानों की मजबूती पर पूरा भरोसा है। बदेखा ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, "हमारे पास बेहद भरोसेमंद विमान हैं।"

HAL और UAC का यह जॉइंट वेंचर भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' मिशन के लिए एक मील का पत्थर है। इससे न सिर्फ भारी संख्या में रोजगार पैदा होंगे, बल्कि प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी भी बढ़ेगी। सबसे अहम बात—एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भारत का रुतबा पूरी दुनिया में कई गुना बढ़ जाएगा।

वह दिन दूर नहीं, जब भारतीय लोग गर्व से कह सकेंगे कि वे जिस विमान में सफर कर रहे हैं, वह किसी विदेशी कंपनी का नहीं, बल्कि 'मेड इन इंडिया' है!
 
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