मई 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारतीय वायुसेना (IAF) की युद्ध नीति की पूरी तस्वीर बदल कर रख दी है।
7 मई की रात को जो एक सीमित और आतंकवाद-विरोधी स्ट्राइक के रूप में शुरू हुआ था, वह चंद दिनों के भीतर पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर एक पूर्ण हवाई युद्ध में तब्दील हो गया।
इस सैन्य अभियान का सबसे बड़ा सबक दुश्मन के एयर डिफेन्स सिस्टम को नेस्तनाबूद करने की रणनीति, यानी SEAD और DEAD (Suppression and Destruction of Enemy Air Defences) में आया बड़ा बदलाव है।
शुरुआती हिचकिचाहट और उसकी कीमत
ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती चरण में, भारत ने जानबूझकर पाकिस्तानी एयर डिफेन्स को निशाना बनाने (SEAD/DEAD) से परहेज किया था। राजनैतिक नेतृत्व का स्पष्ट निर्देश था कि युद्ध भड़कने और नागरिकों के मारे जाने का खतरा कम करने के लिए केवल आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाया जाए।सैन्य विज्ञान में SEAD/DEAD का मतलब है हमला करने से पहले दुश्मन के रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम को अंधा कर देना या तबाह कर देना, ताकि आपके लड़ाकू विमान दुश्मन की सीमा में सुरक्षित उड़ान भर सकें।
शुरुआत में इस रणनीति को न अपनाने की भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ी। पाकिस्तान पूरी तरह तैयार था और उसके F-16 लड़ाकू विमानों ने AIM-120C मिसाइलों के जरिये बढ़त बना ली।
इंडोनेशिया में भारतीय पूर्व चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि शुरुआती हिचकिचाहट और राजनैतिक पाबंदियों के कारण भारतीय वायुसेना को कुछ शुरुआती नुकसान झेलने पड़े।
रणनीति में बदलाव और पाकिस्तान की तबाही
शुरुआती झटके के बाद वायुसेना ने अपनी रणनीति बदली और फिर जो हुआ, वह पाकिस्तान के लिए एक बुरे सपने जैसा था।भारत ने सबसे पहले पाकिस्तानी रडार और चीनी एयर डिफेन्स सिस्टम को जाम किया और तबाह किया। एक वरिष्ठ अधिकारी के शब्दों में कहें तो, "हमने पहले उनके एयर डिफेन्स को मारा, और इसी वजह से हमारे सतह-से-हवा (SAM) और ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल हमले बिना किसी रुकावट के अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंचे।"
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) और हालिया सैन्य खुलासों के अनुसार, जब वायुसेना ने SEAD को प्राथमिकता दी, तो मात्र 23 मिनट में पाकिस्तानी एयर डिफेन्स को बाइपास करते हुए तबाही मचा दी गई।
बहावलपुर और मुरीदके (मरकज़ सुभान अल्लाह और मरकज़ तैयबा) के आतंकी कैंपों से आगे बढ़कर, भारतीय वायुसेना ने सरगोधा, नूर खान, मुरीद, रफीकी, जकोबाबाद और कराची के मलीर कैंट जैसे पाकिस्तानी एयरबेसों और रडार साइट्स (गुजरांवाला, लाहौर, पसूर) को धुआं-धुआं कर दिया।
जनरल चौहान ने हाल ही में खुलासा किया है कि जब पाकिस्तान ने घुटने टेक कर सुबह 10 बजे बातचीत की पेशकश की थी, उसके बावजूद वायुसेना प्रमुख की सलाह पर सरगोधा एयरबेस पर एक और जोरदार हमला अंजाम दिया गया था।
भारत की अजेय ढाल: S-400 सुदर्शन का कमाल
जहां एक तरफ भारत के ब्रह्मोस और स्पाइस बम पाकिस्तान पर बरस रहे थे, वहीं भारत के अपने आसमान की सुरक्षा का जिम्मा 'S-400 सुदर्शन' एयर डिफेन्स सिस्टम ने बखूबी निभाया।वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने स्पष्ट किया है कि S-400 की शानदार मारक क्षमता के कारण पाकिस्तानी लड़ाकू विमान इतनी हिम्मत ही नहीं जुटा पाए कि वे पास आकर अपने स्टैंड-ऑफ ग्लाइड बम गिरा सकें।
इसी दौरान S-400 ने इतिहास का संभवतः सबसे लंबी दूरी का शिकार किया। करीब 300 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तान के एक बड़े सर्विलांस और रडार विमान (संभवतः AEW&C या ELINT विमान, जो हवा से जासूसी करते हैं) को हवा में ही खाक कर दिया गया।
इसने यह साबित कर दिया कि भारत का एयर डिफेन्स अब अलग-अलग टुकड़ों में काम नहीं करता, बल्कि एक अभेद्य, नेटवर्क-आधारित ढाल बन चुका है।
भविष्य की तैयारी और लोअर एयरस्पेस का इस्तेमाल
सिंदूर के बाद से वायुसेना की लीडरशिप का स्पष्ट मानना है कि अगला युद्ध इस तरह का नहीं होगा।वाइस चीफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने आगाह किया है कि दुश्मन भी अपनी गलतियों से सीखेगा। वायुसेना अब "जैसा युद्ध होगा, वैसी ही ट्रेनिंग" के सिद्धांत पर काम कर रही है और अपनी कॉम्बैट क्षमता को और घातक बनाने के लिए 'रोडमैप 2047' तैयार कर चुकी है।
जनरल चौहान के अनुसार भारत ने इस ऑपरेशन में 'लोअर एयरस्पेस' (निचले हवाई क्षेत्र) का भी बखूबी इस्तेमाल किया, जिसमें ड्रोन और लॉयटरिंग म्युनिशंस (हवा में मंडराने वाले आत्मघाती ड्रोन) शामिल थे, ताकि बिना पूर्ण युद्ध भड़काए दुश्मन को संभलने का मौका न मिले।
भविष्य की रणनीति में लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स और मिसाइल बैटरियों को एक सिंगल नेटवर्क से जोड़ने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
'ऑपरेशन सिंदूर' और उसके जवाब में शुरू किया गया पाकिस्तान का 'ऑपरेशन बुनियान-उम-मरसूस' (जो महज़ आठ घंटे में दम तोड़ गया) ने भारतीय सैन्य थिंक टैंक को एक स्पष्ट संदेश दिया है।
शुरुआती संयम ने बेशक भारत को नुकसान पहुंचाया, लेकिन बाद में 'सबसे पहले दुश्मन का डिफेन्स तबाह करो' की नीति ने युद्ध का पासा पलट दिया।
वायुसेना अब इस युद्धकालीन सुधार को अपनी स्थायी युद्ध नीति का हिस्सा बना चुकी है। S-400 की अचूक सटीकता और भविष्य की नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि राजनैतिक मंजूरी मिलते ही भारतीय वायुसेना दुश्मन की सीमा में कहीं भी और कितनी भी गहराई तक मार करने का माद्दा रखती है।