रक्षा क्षेत्र और भू-राजनीति से एक बड़ी अपडेट सामने आ रही है। हाल ही में पाकिस्तानी सेना ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो जारी किया है, जिसमें उन्होंने अपने जखीरे में शामिल नए तुर्की हथियारों का दिखावा किया है।
इस वीडियो की सबसे अहम और ध्यान खींचने वाली बात है तुर्की की मशहूर एयरोस्पेस कंपनी 'बायकर' (Baykar) द्वारा बनाया गया K2 कामिकाजे (Kamikaze) ड्रोन।
2000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता वाला यह मानवरहित विमान (UAV) अब पाकिस्तानी बेड़े का हिस्सा बन चुका है।
एक भारतीय नजरिए से, अपने पड़ोस में पनप रही इस नई सैन्य तकनीक को समझना हमारे लिए बेहद जरूरी है। आइए, तकनीकी उलझनों से परे हटकर आसान भाषा में समझते हैं कि यह K2 ड्रोन क्या बला है और यह कैसे काम करता है।
क्या होता है कामिकाजे ड्रोन और कितनी है K2 की ताकत?
'कामिकाजे' का सीधा मतलब होता है आत्मघाती। यानी यह कोई ऐसा ड्रोन नहीं है जो सिर्फ मिसाइल फायर करके वापस आ जाए; यह खुद ही एक उड़ती हुई क्रूज मिसाइल की तरह काम करता है और सीधे अपने लक्ष्य से टकराकर उसे नेस्तनाबूद कर देता है।K2 ड्रोन अपने क्लास का सबसे बड़ा कामिकाजे प्लेटफॉर्म है। इसका कुल वजन 800 किलोग्राम है और यह अपने साथ 200 किलोग्राम का भारी-भरकम वारहेड (विस्फोटक) लेकर उड़ सकता है।
200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ते हुए यह लगातार 13 घंटे तक हवा में रह सकता है। इसकी 2000 किमी की रेंज इसे लंबी दूरी के रणनीतिक ठिकानों (Strategic targets) पर हमला करने के काबिल बनाती है।
बिना GPS के भी नहीं भटकता रास्ता (सबसे खतरनाक तकनीक)
आजकल के मॉडर्न युद्धों में 'इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर' (EW) का बहुत इस्तेमाल होता है। यानी दुश्मन देश रेडियो और जीपीएस (GNSS) सिग्नलों को जाम कर देता है ताकि मिसाइलें और ड्रोन अंधे हो जाएं और रास्ता भटक जाएं। लेकिन K2 ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसे जीपीएस की जरूरत ही नहीं है।यह पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस है। इसके निचले हिस्से में बेहद एडवांस 'गिम्बल' और नाइट-विज़न कैमरे लगे हैं।
जब सैटेलाइट सिग्नल कट जाते हैं, तब यह ड्रोन अपनी आंखों (कैमरों) से नीचे की जमीन, पहाड़ों और रास्तों को स्कैन करता है और अपने दिमाग (AI) में मौजूद नक्शे से उसका मिलान करता है।
आसान शब्दों में कहें तो यह बिना किसी बाहरी मदद के, अपनी सूझबूझ से लक्ष्य तक पहुंच जाता है और 'विजुअल लॉक-ऑन' के जरिए पिनपॉइंट सटीकता से हमला करता है।
'स्वार्म' तकनीक और कहीं से भी उड़ने की आजादी
K2 की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह 'स्वार्म' (Swarm) यानी झुंड में उड़ने में सक्षम है। जब दर्जनों ड्रोन एक साथ अलग-अलग दिशाओं से किसी टारगेट पर हमला करते हैं, तो दुनिया के बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम भी उन्हें रोकने में कन्फ्यूज हो जाते हैं।इसके अलावा, इसे उड़ान भरने के लिए किसी बड़े और पक्के रनवे की दरकार नहीं है। यह छोटी या कच्ची पट्टियों से भी आसानी से टेक-ऑफ कर सकता है। साथ ही, सैटेलाइट डेटा लिंक (LOS/BLOS) की मदद से इसे दुनिया के किसी भी कोने में बैठे कमांडरों द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है।
भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) और रक्षा जानकारों के मुताबिक, तुर्की की 'बायकर' कंपनी वही है जिसने मशहूर टीबी-2 (TB2) बायरकतार और अकिंची जैसे ड्रोन बनाए हैं।पाकिस्तान लगातार तुर्की से इन हथियारों की खरीद कर रहा है, जो उनके बीच गहरे होते रक्षा संबंधों को दर्शाता है।
2000 किमी की रेंज का मतलब है कि यह ड्रोन भौगोलिक रूप से काफी अंदर तक मार करने की सैद्धांतिक क्षमता रखता है।
हालांकि, घबराने जैसी कोई बात नहीं है। भारतीय सशस्त्र बल इन नए खतरों से पूरी तरह वाकिफ हैं।
भारतीय सेना और DRDO तेजी से स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम, डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (लेजर हथियार) और अपनी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं को अभेद्य बना रहे हैं।
इसके अलावा, भारत का बहुस्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क (जैसे S-400, MRSAM और आकाश) किसी भी ऐसे हवाई खतरे को सीमा पार करते ही खाक में मिलाने में पूरी तरह सक्षम है।
दुश्मन तकनीक चाहे जितनी बदल ले, हमारे वीर जवानों की मुस्तैदी और भारत की तकनीकी तैयारी हमेशा दो कदम आगे ही रहती है।