भारतीय वायुसेना का 'इलेक्ट्रॉनिक ब्रह्मास्त्र': SEAD/DEAD मिशन के लिए राफेल का EW Variant विकसित करने की तैयारी

भारतीय वायुसेना का 'इलेक्ट्रॉनिक ब्रह्मास्त्र': SEAD/DEAD मिशन के लिए राफेल का EW Variant विकसित करने की तैयारी


भारतीय वायुसेना (IAF) आसमान में अपने दबदबे को एक ऐसे मुकाम पर ले जाने की तैयारी कर रही है, जहां दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम बिना लड़े ही घुटने टेक देंगे।

रक्षा सूत्रों के हवाले से एक बेहद रणनीतिक और अहम खबर सामने आ रही है। वायुसेना 114 नए लड़ाकू विमानों (Rafale F4 Plus वैरिएंट) की खरीद की योजना पर काम कर रही है, लेकिन इसमें एक बड़ा तकनीकी पहलू जुड़ गया है।

खबर है कि वायुसेना राफेल का एक खास 'इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर' (Electronic Warfare - EW) वैरिएंट विकसित करने पर विचार कर रही है। यह खास विमान खासतौर पर SEAD और DEAD मिशनों को अंजाम देने के लिए तैयार किया जाएगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह SEAD और DEAD क्या बला है? आइए इस जटिल मिलिट्री टेक्नोलॉजी को बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।

SEAD और DEAD: दुश्मन की आंखें फोड़ने की कला​

आधुनिक युद्ध में लड़ाकू विमानों को सबसे बड़ा खतरा दुश्मन के 'एयर डिफेन्स' (Air Defence) नेटवर्क से होता है, जैसे चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात HQ-9 या LY-80 मिसाइल सिस्टम।
  • SEAD (Suppression of Enemy Air Defences): इसका मतलब है दुश्मन के रडार और कम्यूनिकेशन सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक तरंगों से जाम कर देना। आसान शब्दों में कहें तो "दुश्मन के रडार की आंखों पर पट्टी बांध देना" ताकि वे हमारे विमानों को देख ही न पाएं।
  • DEAD (Destruction of Enemy Air Defences): इसका मतलब है जैसे ही दुश्मन का रडार ऑन हो, उसकी तरंगों को ट्रैक करके उस पर मिसाइल दाग देना। यानी, "दुश्मन की आंखें हमेशा के लिए फोड़ देना"।

राफेल का SPECTRA: एक अभेद्य सुरक्षा कवच​

राफेल लड़ाकू विमान पहले से ही अपने 'स्पेक्ट्रा' (SPECTRA) सिस्टम के कारण दुनिया के सबसे सुरक्षित विमानों में गिना जाता है। यह सिस्टम विमान के चारों ओर एक अदृश्य इलेक्ट्रॉनिक शील्ड बना देता है।

चाहे दुश्मन की रडार वेव हो, लेजर गाइडेड मिसाइल हो या इन्फ्रारेड खतरा—स्पेक्ट्रा मीलों दूर से ही इसे सूंघ लेता है। इसमें रडार वार्निंग, लेजर वार्निंग और मिसाइल वार्निंग रिसीवर लगे हैं।

साथ ही, यह दुश्मन के रडार को जाम करने और डिकॉय (नकली लक्ष्य) छोड़कर मिसाइल को भटकाने में माहिर है। इसमें लगा डेडिकेटेड मैनेजमेंट यूनिट इतना स्मार्ट है कि पायलट को बिना उलझाए सेकंड के सौवें हिस्से में खुद ही जवाबी कार्रवाई का फैसला ले लेता है।

अमेरिका के 'ग्रोलर' (Growler) की तर्ज पर मास्टरप्लान​

सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना का यह नया राफेल ईडब्ल्यू वैरिएंट अमेरिकी नौसेना के खतरनाक 'बोइंग EA-18G Growler' की तर्ज पर काम कर सकता है। ग्रोलर का मुख्य काम लड़ाकू विमानों के बेड़े (Strike Force) के साथ उड़ना और पूरे इलाके के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम को जाम कर देना होता है।

अगर भारत राफेल का ऐसा वैरिएंट बनाता है, तो यह विमान एक "इलेक्ट्रॉनिक बॉडीगार्ड" के रूप में काम करेगा। यह विमान न केवल अपनी रक्षा करेगा, बल्कि इसके साथ बमबारी करने जा रहे सुखोई (Su-30 MKI) और जगुआर जैसे विमानों को भी दुश्मन के रडार से छिपाकर सुरक्षित रखेगा।

देसी मिसाइल और राफेल का घातक कॉम्बिनेशन​

इस नए राफेल वैरिएंट की सबसे बड़ी मारक क्षमता होगी डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित 'रुद्रम-1' (RudraM-1) एंटी-रेडिएशन मिसाइल। 150 से 200 किलोमीटर की रेंज वाली यह स्वदेशी मिसाइल दुश्मन के रडार से निकलने वाली रेडियो तरंगों का पीछा करते हुए सीधे रडार स्टेशन को तबाह कर देती है।

इसके अलावा, तेजस Mk1A और Mk2 प्रोग्राम के तहत भारत में विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक 'एक्सटर्नल EW पॉड्स' (External EW Pods) भी इस राफेल में लगाए जाएंगे।

राफेल का अपना इनबिल्ट स्पेक्ट्रा (SPECTRA) सिस्टम और विंग्स पर लगे स्वदेशी एक्सटर्नल ईडब्ल्यू पॉड्स जब एक साथ (in-tandem) सिंक होकर काम करेंगे, तो एक अकेला विमान पूरे फॉर्मेशन को सुरक्षा दे सकेगा और जरूरत पड़ने पर अकेले ही SEAD/DEAD मिशन को अंजाम देकर लौट सकेगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम​

फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इस खास राफेल EW वैरिएंट को मूल फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट (Dassault) के सहयोग से विकसित किया जाएगा या फिर भारतीय वायुसेना स्वदेशी डिफेन्स कंपनियों के साथ मिलकर इसे पूरी तरह 'इन-हाउस' तैयार करेगी।

देश की सीमाओं की सुरक्षा और आसमान में अपनी धाक जमाने के लिए भारतीय वायुसेना लगातार तकनीकी रूप से खुद को अपग्रेड कर रही है।

भविष्य के युद्ध हथियारों से ज्यादा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम पर लड़े जाएंगे, और राफेल का यह 'इलेक्ट्रॉनिक योद्धा' अवतार निश्चित ही भारत के दुश्मनों के एयर डिफेन्स नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने के लिए काफी होगा।
 
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