भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत का आसमान एक अभेद्य किले में तब्दील हो चुका है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने एक बेहद रोमांचक और गर्व करने वाली जानकारी साझा की है।
हमारे स्वदेशी एयर-डिफेंस सिस्टम 'आकाश' (Akash) और 'स्पाइडर' (Spyder) ने एक बेहद जटिल युद्धाभ्यास में दुनिया के सबसे घातक और अचूक माने जाने वाले 'SPICE' और 'HAMMER' स्मार्ट हथियारों को हवा में ही ट्रैक करके नेस्तनाबूद करने की क्षमता दर्शाई है।
यह कामयाबी सिर्फ एक परीक्षण नहीं है, बल्कि दुश्मनों के लिए एक साफ चेतावनी है कि वे भारत की तरफ आँख उठाने से पहले हजार बार सोचें।
पोखरण के आसमान में जब गरजे सुखोई और राफेल
यह कोई आम युद्धाभ्यास नहीं था, बल्कि असली युद्ध जैसे हालातों को परखने की एक कड़ी परीक्षा थी।रिपोर्ट के अनुसार, यह विशेष फायरिंग अभ्यास राजस्थान की तपती रेत के बीच पोखरण फायरिंग रेंज में 1 से 12 सितंबर 2025 और फिर 11 नवंबर 2025 को किया गया।
इस दौरान वायुसेना के सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों— सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) और राफेल (Rafale)— से इन 'स्टैंड-ऑफ' हथियारों को दागा गया।
मकसद यह देखना था कि जब दुश्मन के आधुनिक फाइटर जेट हम पर ये स्मार्ट बम गिराएं, तो क्या हमारे डिफेंस सिस्टम उन्हें हवा में ही रोक सकते हैं? और हमारे सिस्टम्स ने 100% सफलता के साथ इस परीक्षा को पास किया।
क्यों यह इंटरसेप्शन है दुनिया के लिए अचरज की बात?
सैन्य तकनीक को समझने वालों के लिए यह एक बहुत बड़ी खबर है। इसे ऐसे समझिए: एक बड़े लड़ाकू विमान को रडार पर खोजना काफी आसान होता है।लेकिन 'SPICE' और 'HAMMER' जैसे प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशंस (PGMs) या 'स्मार्ट बमों' को रडार पर पकड़ना भूसे के ढेर में सूई ढूँढने जैसा है।
- आकार में बेहद छोटे: इनका रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) बहुत कम होता है, जिससे ये रडार की नजरों से बच निकलते हैं।
- उड़ने का तरीका: ये बम जमीन की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से (Terrain-following) छिपकर उड़ते हैं।
- कम समय: ये इतनी तेजी से टारगेट की तरफ बढ़ते हैं कि बचाव का समय (Reaction Time) न के बराबर होता है।
हमलावर हथियार कितने घातक थे?
- SPICE: यह इजरायल द्वारा विकसित एक बेहद सटीक हथियारों का परिवार है। सैटेलाइट, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और इनर्शियल नेविगेशन की मदद से यह सटीक निशाना लगाता है। (याद रहे, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक में भारतीय वायुसेना ने आतंकियों के सफाए के लिए SPICE-2000 का ही इस्तेमाल किया था)।
- HAMMER (AASM): फ्रांसीसी कंपनी साफरान (Safran) द्वारा बनाया गया यह बम राफेल की मुख्य ताकतों में से एक है। इसमें लेजर, इन्फ्रारेड और सैटेलाइट गाइडेंस होती है, जो इसे किसी भी मौसम में अचूक बनाती है।
'आकाश' और 'स्पाइडर': भारत के अजेय रक्षक
जब इन दोनों खतरनाक बमों को पोखरण में दागा गया, तो जमीन पर तैनात हमारे एयर-डिफेंस सिस्टम्स ने अपना जादू दिखाया:- स्वदेशी 'आकाश' (Akash): रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा पूरी तरह भारत में निर्मित इस सिस्टम ने अपनी बिजली सी फुर्ती दिखाई। आकाश को मुख्य रूप से विमानों, हेलिकॉप्टरों और ड्रोन्स को गिराने के लिए बनाया गया था, लेकिन इस परीक्षण ने साबित कर दिया कि यह छोटे और लो-फ्लाइंग (नीचे उड़ने वाले) स्मार्ट बमों को भी धूल चटा सकता है।
- स्पाइडर (Spyder): इजरायल से लिया गया यह क्विक-रिएक्शन सिस्टम अपनी 'डर्बी' (Derby) और 'पाइथन' (Python) मिसाइलों से लैस है। इसके शानदार रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर्स ने पलक झपकते ही हवा में आ रहे खतरे को भांपा और उसे नष्ट कर दिया।
निष्कर्ष: भविष्य के युद्धों के लिए भारत की तैयारी
आज के आधुनिक युद्धों (जैसे रूस-यूक्रेन या मिडिल ईस्ट संघर्ष) में हमने देखा है कि पारंपरिक विमानों से ज्यादा खतरा ड्रोन्स और प्रिसिजन बमों (PGMs) से है। भारत का यह युद्धाभ्यास दुनिया और हमारे पड़ोसियों को एक कड़ा संदेश है।सुखोई और राफेल जैसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स से दागे गए अत्याधुनिक हथियारों को हवा में ही भस्म करके 'आकाश' और 'स्पाइडर' ने आश्वस्त किया है कि भारत का रक्षा कवच अभेद्य है। दुश्मन चाहे कितने भी 'स्मार्ट' हथियार क्यों न ले आए, भारतीय वायुसेना उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।